Lord Kartikeya

श्री षण्मुख षट्कम्

(Shri Shanmukha Shatkam)

Traditional

Shri Shanmukha Shatkam is a soul-stirring devotional hymn dedicated to Lord Kartikeya, the divine commander-in-chief of the celestial army and son of Lord Shiva. Composed in an elegant and rhythmic style, the stotra praises the Lord’s radiant beauty, his role as the destroyer of ego and ignorance represented by the demon Krauncha, and his grace as a bestower of spiritual wisdom. Reciting this six-verse prayer is believed to cleanse the heart of fear, bestow mental clarity, and grant the devotee unwavering devotion to the lotus feet of Lord Murugan, ultimately leading to spiritual liberation.

गिरितनयासुत गाङ्गपयोदित गन्धसुवासित बालतनो
गुणगणभूषण कोमलभाषण क्रौञ्चविदारण कुन्दतनो ।
गजमुखसोदर दुर्जयदानवसङ्घविनाशक दिव्यतनो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 1 ॥
प्रतिगिरिसंस्थित भक्तहृदिस्थित पुत्रधनप्रद रम्यतनो
भवभयमोचक भाग्यविधायक भूसुतवार सुपूज्यतनो ।
बहुभुजशोभित बन्धविमोचक बोधफलप्रद बोधतनो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 2 ॥
शमधनमानित मौनिहृदालय मोक्षकृदालय मुग्धतनो
शतमखपालक शङ्करतोषक शङ्खसुवादक शक्तितनो ।
दशशतमन्मथ सन्निभसुन्दर कुण्डलमण्डित कर्णविभो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 3 ॥
गुह तरुणारुणचेलपरिष्कृत तारकमारक मारतनो
जलनिधितीरसुशोभिवरालय शङ्करसन्नुत देवगुरो ।
विहितमहाध्वरसामनिमन्त्रित सौम्यहृदन्तर सोमतनो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 4 ॥
लवलिकया सह केलिकलापर देवसुतार्पित माल्यतनो
गुरुपदसंस्थित शङ्करदर्शित तत्त्वमयप्रणवार्थविभो ।
विधिहरिपूजित ब्रह्मसुतार्पित भाग्यसुपूरक योगितनो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 5 ॥
कलिजनपालन कञ्जसुलोचन कुक्कुटकेतन केलितनो
कृतबलिपालन बर्हिणवाहन फालविलोचनशम्भुतनो ।
शरवणसम्भव शत्रुनिबर्हण चन्द्रसमानन शर्मतनो
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 6 ॥
सुखदमनन्तपदान्वित रामसुदीक्षित सत्कविपद्यमिदं
शरवण सम्भव तोषदमिष्टदमष्टसुसिद्धिदमार्तिहरम् ।
पठति शृणोति च भक्तियुतो यदि भाग्यसमृद्धिमथो लभते
जय जय हे गुह षण्मुख सुन्दर देहि रतिं तव पादयुगे ॥ 7 ॥
इति श्रीअनन्तरामदीक्षित कृतं षण्मुख षट्कम् ॥

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