Goddess Saraswati

सरस्वती अष्टोत्तर शत नामावलि

(Saraswati Ashtottara Shatanamavali)

Traditional

The Saraswati Ashtottara Shatanamavali consists of one hundred and eight sacred names of Goddess Saraswati, the divine embodiment of knowledge, music, arts, wisdom, and learning. By chanting these names with devotion, seekers invoke the goddess's grace to clear mental blocks, enhance intellectual clarity, and foster spiritual growth. Traditionally recited during Navratri or on Vasant Panchami, this stotra serves as a powerful meditative tool to harmonize the intellect with divine consciousness. Regular recitation is believed to bestow eloquence, sharpen memory, improve academic performance, and guide the practitioner toward the ultimate realization of truth and enlightenment.

ॐ श्री सरस्वत्यै नमः
ॐ महाभद्रायै नमः
ॐ महामायायै नमः
ॐ वरप्रदायै नमः
ॐ श्रीप्रदायै नमः
ॐ पद्मनिलयायै नमः
ॐ पद्माक्ष्यै नमः
ॐ पद्मवक्त्रिकायै नमः
ॐ शिवानुजायै नमः
ॐ पुस्तकहस्तायै नमः (10)
ॐ ज्ञानमुद्रायै नमः
ॐ रमायै नमः
ॐ कामरूपायै नमः
ॐ महाविद्यायै नमः
ॐ महापातक नाशिन्यै नमः
ॐ महाश्रयायै नमः
ॐ मालिन्यै नमः
ॐ महाभोगायै नमः
ॐ महाभुजायै नमः
ॐ महाभागायै नमः (20)
ॐ महोत्साहायै नमः
ॐ दिव्याङ्गायै नमः
ॐ सुरवन्दितायै नमः
ॐ महाकाल्यै नमः
ॐ महापाशायै नमः
ॐ महाकारायै नमः
ॐ महाङ्कुशायै नमः
ॐ सीतायै नमः
ॐ विमलायै नमः
ॐ विश्वायै नमः (30)
ॐ विद्युन्मालायै नमः
ॐ वैष्णव्यै नमः
ॐ चन्द्रिकायै नमः
ॐ चन्द्रलेखाविभूषितायै नमः
ॐ महाफलायै नमः
ॐ सावित्र्यै नमः
ॐ सुरसायै नमः
ॐ देव्यै नमः
ॐ दिव्यालङ्कार भूषितायै नमः
ॐ वाग्देव्यै नमः (40)
ॐ वसुधायै नमः
ॐ तीव्रायै नमः
ॐ महाभद्रायै नमः
ॐ महाबलायै नमः
ॐ भोगदायै नमः
ॐ भारत्यै नमः
ॐ भामायै नमः
ॐ गोमत्यै नमः
ॐ जटिलायै नमः
ॐ विन्ध्यावासायै नमः (50)
ॐ चण्डिकायै नमः
ॐ सुभद्रायै नमः
ॐ सुरपूजितायै नमः
ॐ विनिद्रायै नमः
ॐ वैष्णव्यै नमः
ॐ ब्राह्म्यै नमः
ॐ ब्रह्मज्ञानैकसाधनायै नमः
ॐ सौदामिन्यै नमः
ॐ सुधामूर्तये नमः
ॐ सुवीणायै नमः (60)
ॐ सुवासिन्यै नमः
ॐ विद्यारूपायै नमः
ॐ ब्रह्मजायायै नमः
ॐ विशालायै नमः
ॐ पद्मलोचनायै नमः
ॐ शुम्भासुर प्रमथिन्यै नमः
ॐ धूम्रलोचन मर्दिन्यै नमः
ॐ सर्वात्मिकायै नमः
ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः
ॐ शुभदायै नमः (70)
ॐ शास्त्ररूपिण्यै नमः
ॐ सर्वदेवस्तुतायै नमः
ॐ सौम्यायै नमः
ॐ सुरासुर नमस्कृतायै नमः
ॐ रक्तबीज निहन्त्र्यै नमः
ॐ चामुण्डायै नमः
ॐ मुण्डकाम्बिकायै नमः
ॐ कालरात्र्यै नमः
ॐ प्रहरणायै नमः
ॐ कलाधारायै नमः (80)
ॐ निरञ्जनायै नमः
ॐ वरारोहायै नमः
ॐ वाग्देव्यै नमः
ॐ वाराह्यै नमः
ॐ वारिजासनायै नमः
ॐ चित्राम्बरायै नमः
ॐ चित्रगन्धायै नमः
ॐ चित्रमाल्य विभूषितायै नमः
ॐ कान्तायै नमः
ॐ कामप्रदायै नमः (90)
ॐ वन्द्यायै नमः
ॐ रूपसौभाग्यदायिन्यै नमः
ॐ श्वेताननायै नमः
ॐ रक्त मध्यायै नमः
ॐ द्विभुजायै नमः
ॐ सुरपूजितायै नमः
ॐ निरञ्जनायै नमः
ॐ नीलजङ्घायै नमः
ॐ चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः
ॐ चतुरानन साम्राज्ज्यै नमः (100)
ॐ ब्रह्मविष्णु शिवात्मिकायै नमः
ॐ हंसासनायै नमः
ॐ महाविद्यायै नमः
ॐ मन्त्रविद्यायै नमः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ महासरस्वत्यै नमः
ॐ विद्यायै नमः
ॐ ज्ञानैकतत्परायै नमः (108)
इति श्रीसरस्वत्यष्टोत्तरशतनामावलिः समाप्ता ॥

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