Lord Vishnu

श्री मध्वाचार्य कृत द्वादश स्तोत्र - पञ्चमस्तोत्रम्

(Dvadasha Stotra - Fifth Stotra)

Sri Madhvacharya

The fifth hymn of the Dvadasha Stotra composed by the Dvaita philosopher Sri Madhvacharya is a profound invocation of Lord Vishnu as the supreme controller of the universe. Characterized by complex poetic structure and deep theological precision, this stotra emphasizes the removal of ignorance and the breaking of worldly bonds. Chanting this hymn with devotion is believed to sharpen the intellect, grant clarity of thought, and facilitate the seeker's journey toward spiritual liberation by fostering an unwavering connection with the supreme essence of Lord Narayana.

अथ पञ्चमस्तोत्रम् वासुदेवापरिमेयसुधामन् शुद्धसदोदित सुन्दरीकान्त ।

धराधरधारण वेधुरधर्तः सौधृतिदीधितिवेधृविधातः ॥ 1॥
अधिकबन्धं रन्धय बोधा च्छिन्धिपिधानं बन्धुरमद्धा ।
केशव केशव शासक वन्दे पाशधरार्चित शूरपरेश (शूरवरेश) ॥ 2॥
नारायणामलतारण (कारण) वन्दे कारणकारण पूर्ण वरेण्य ।
माधव माधव साधक वन्दे बाधक बोधक शुद्ध समाधे ॥ 3॥
गोविन्द गोविन्द पुरन्दर वन्दे स्कन्द सनन्दन वन्दित पाद ।
विष्णु सृजिष्णु ग्रसिष्णु विवन्दे कृष्ण सदुष्ण वधिष्ण सुधृष्णो ॥ 4॥
विष्णो सृजिष्णो ग्रसिष्णो विवन्दे कृष्ण सदुष्णवधिष्णो सुधृष्णो
मधुसूदन दानवसादन वन्दे दैवतमोदन (दैवतमोदित) वेदित पाद ।
त्रिविक्रम निष्क्रम विक्रम वन्दे सुक्रम सङ्क्रमहुङ्कृतवक्त्र ॥ 5॥
(सङ्क्रम सुक्रम हुङ्कृतवक्त्र)
वामन वामन भामन वन्दे सामन सीमन सामन सानो ।
श्रीधर श्रीधर शन्धर वन्दे भूधर वार्धर कन्धरधारिन् ॥ 6॥
हृषीकेश सुकेश परेश विवन्दे शरणेश कलेश बलेश सुखेश ।
पद्मनाभ शुभोद्भव वन्दे सम्भृतलोकभराभर भूरे ।
दामोदर दूरतरान्तर वन्दे दारितपारक पार (दारितपारगपार) परस्मात् ॥ 7॥
आनन्दसुतीर्थ मुनीन्द्रकृता हरिगीतिरियं परमादरतः ।
परलोकविलोकन सूर्यनिभा हरिभक्ति विवर्धन शौण्डतमा ॥ 8॥
इति श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्य विरचितं द्वादशस्तोत्रेषु पञ्चमस्तोत्रं सम्पूर्णम्

Explore More