Sai Baba of Shirdi

श्री शिर्डी साई चलीसा

(Shri Shirdi Sai Chalisa)

Traditional

The Shirdi Sai Chalisa is a reverent devotional composition dedicated to Shirdi Sai Baba, revered by his devotees as an incarnation of Dattatreya and the Trimurti. Composed in Telugu, this stotra celebrates his ascetic life, his teachings of sacrifice and patience, and his role as a spiritual guide residing in the hearts of his followers. Chanting this Chalisa serves as a meditative practice to seek the blessings of the Sadguru, find inner peace, overcome worldly obstacles, and attain spiritual liberation. It emphasizes the profound connection between the devotee and the divine presence of Sai Baba.

शिरिडीवासा साईप्रभो जगतिकि मूलं नीवे प्रभो
दत्त दिगम्बर अवतारं नीलो सृष्टि व्यवहारम् ॥
त्रिमूर्तिरूपा ओ साई करुणिञ्चि कापाडोयि
दर्शनमिय्य गरावय्य मुक्तिकि मार्गं चूपुमया ॥ 1 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
कफिनि वस्त्रमु धरियिञ्चि भुजमुकु जोली तगिलिञ्चि
निम्ब वृक्षपु छायलो फकीरु वेषपु धारणलो
कलियुगमन्दुन वॆलसितिवि त्यागं सहनं नेर्पितिवि
शिरिडी ग्रामं नी वासं भक्तुल मदिलो नी रूपम् ॥ 2 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
चान्द् पाटिल् नु कलुसुकुनि आतनि बाधलु तॆलुसुकुनि
गुर्रमु जाड तॆलिपितिवि पाटिल् बाधनु तीर्चितिवि
वॆलिगिञ्चावु ज्योतुलनु नीवुपयोगिञ्चि जलमुलनु
अच्चॆरुवॊन्दॆनु आ ग्रामं चूसि विन्तैन आ दृश्यम् ॥ 3 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
बायिजा चेसॆनु नी सेव प्रतिफलमिच्चावो देवा
नी आयुवुनु बदुलिच्चि तात्यानु नीवु ब्रतिकिञ्चि
पशुपक्षुलनु प्रेमिञ्चि प्रेमतो वाटिनि लालिञ्चि
जीवुलपैन ममकारं चित्रमया नी व्यवहारम् ॥ 4 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
नी द्वारमुलो निलिचितिनि निन्ने नित्यमु कॊलिचितिनि
अभयमुनिच्चि ब्रोवुमया ओ शिरिडीशा दयामया
धन्यमु द्वारक ओ मायी नीलो निलिचॆनु श्रीसाई
नी धुनि मण्टल वेडिमिकि पापमु पोवुनु ताकिडिकि ॥ 5 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
प्रलय कालमु आपितिवि भक्तुलनु नीवु ब्रोचितिवि
चेसि महम्मारी नाशं कापाडि शिरिडी ग्रामं
अग्निहोत्रि शास्त्रिकि लीला महात्म्यं चूपिञ्चि
श्यामानु ब्रतिकिञ्चितिवि पामु विषमु तॊलिगिञ्चि ॥ 6 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
भक्त भीमाजीकि क्षयरोगं नशियिञ्चे आतनि सहनं
ऊदी वैद्यं चेसावु व्याधिनि मायं चेसावु
काकाजीकि ओ साई विठल दर्शन मिच्चितिवि
दामूकिच्चि सन्तानं कलिगिञ्चितिवि सन्तोषम् ॥ 7 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
करुणासिन्धू करुणिञ्चु मापै करुण कुरिपिञ्चु
सर्वं नीके अर्पितमु पॆञ्चुमु भक्ति भावमुनु
मुस्लिं अनुकॊनि निनु मेघू तॆलुसुकुनि आतनि बाध
दाल्चि शिवशङ्कर रूपं इच्चावय्या दर्शनमु ॥ 8 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
डाक्टरुकु नीवु रामुनिगा बल्वन्तकु श्रीदत्तुनिगा
निमोनुकरकु मारुतिगा चिदम्बरकु श्रीगणपतिगा
मार्ताण्डकु खण्डोबागा गणूकु सत्यदेवुनिगा
नरसिंहस्वामिगा जोषिकि दर्शनमु निच्चिन श्रीसाई ॥ 9 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
रेयि पगलु नी ध्यानं नित्यं नी लीला पठनं
भक्तितो चेयण्डि ध्यानं लभिञ्चुनु मुक्तिकि मार्गं
पदकॊण्डु नी वचनालु बाबा माकवि वेदालु
शरणनि वच्चिन भक्तुलनु करुणिञ्चि नीवु ब्रोचितिवि ॥ 10 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
अन्दरिलोन नी रूपं नी महिम अति शक्तिमयं
ओ साई मेमु मूढुलमु ऒसगुमया माकु ज्ञानमुनु
सृष्टिकि नीवेनय मूलं साई मेमु सेवकुलं
साई नाममु तलचॆदमु नित्यमु साईनि कॊलिचॆदमु ॥ 11 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
भक्ति भावन तॆलुसुकॊनि साईनि मदिलो निलुपुकॊनि
चित्तमुतो साई ध्यानं चेयण्डि प्रतिनित्यं
बाबा काल्चिन धुनि ऊदि निवारिञ्चुनु अदि व्याधि
समाधि नुण्डि श्रीसाई भक्तुलनु कापाडेनोयि ॥ 12 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
मन प्रश्नलकु जवाबुलु तॆलुपुनु साई चरितमुलु
विनण्डि लेक चदवण्डि साई सत्यमु चूडण्डि
सत्सङ्गमुनु चेयण्डि साई स्वप्नमु पॊन्दण्डि
भेद भावमुनु मानण्डि साई मन सद्गुरुवण्डि ॥ 13 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
वन्दनमय्या परमेशा आपद्बान्धव साईशा
मा पापमुलू कडतेर्चु मा मदि कोरिक नॆरवेर्चु
करुणामूर्ति ओ साई करुणतो ममु दरिचेर्चोयी
मा मनसे नी मन्दिरमु मा पलुकुले नीकु नैवेद्यम् ॥ 14 ॥
शिरिडीवासा साईप्रभो ॥
अखिलाण्डकोटि ब्रह्माण्डनायक
राजाधिराज योगिराज परब्रह्म
श्रीसच्चिदानन्द सद्गुरु साईनाथ् महराज् की जै ॥

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