Goddess Lakshmi

श्री महा लक्ष्मी अष्टोत्तर शत नामावलि

(Shri Maha Lakshmi Ashtottara Shatanamavali)

From Skanda Purana

This sacred text, sourced from the Skanda Purana, serves as a comprehensive devotional prayer consisting of one hundred and eight auspicious names of Goddess Lakshmi, the divine embodiment of wealth, prosperity, and spiritual grace. By chanting these names, devotees express reverence for the various facets of the Goddess who sustains the universe through abundance and auspiciousness. Regular recitation is believed to purify the mind, dispel poverty, and invite harmony, material success, and inner peace into the lives of practitioners, ultimately leading to spiritual fulfillment and the removal of obstacles from one's path.

ॐ प्रकृत्यै नमः
ॐ विकृत्यै नमः
ॐ विद्यायै नमः
ॐ सर्वभूत हितप्रदायै नमः
ॐ श्रद्धायै नमः
ॐ विभूत्यै नमः
ॐ सुरभ्यै नमः
ॐ परमात्मिकायै नमः
ॐ वाचे नमः
ॐ पद्मालयायै नमः (10)
ॐ पद्मायै नमः
ॐ शुचये नमः
ॐ स्वाहायै नमः
ॐ स्वधायै नमः
ॐ सुधायै नमः
ॐ धन्यायै नमः
ॐ हिरण्मय्यै नमः
ॐ लक्ष्म्यै नमः
ॐ नित्यपुष्टायै नमः
ॐ विभावर्यै नमः (20)
ॐ अदित्यै नमः
ॐ दित्यै नमः
ॐ दीप्तायै नमः [दीपायै नमः]
ॐ वसुधायै नमः
ॐ वसुधारिण्यै नमः
ॐ कमलायै नमः
ॐ कान्तायै नमः
ॐ कामाक्ष्यै नमः
ॐ क्षीरोदसम्भवायै नमः
ॐ अनुग्रहपरायै नमः (30)
ॐ बुद्धये नमः
ॐ अनघायै नमः
ॐ हरिवल्लभायै नमः
ॐ अशोकायै नमः
ॐ अमृतायै नमः
ॐ दीप्तायै नमः
ॐ लोकशोक विनाशिन्यै नमः
ॐ धर्मनिलयायै नमः
ॐ करुणायै नमः
ॐ लोकमात्रे नमः (40)
ॐ पद्मप्रियायै नमः
ॐ पद्महस्तायै नमः
ॐ पद्माक्ष्यै नमः
ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः
ॐ पद्मोद्भवायै नमः
ॐ पद्ममुख्यै नमः
ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः
ॐ रमायै नमः
ॐ पद्ममालाधरायै नमः
ॐ देव्यै नमः (50)
ॐ पद्मिन्यै नमः
ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः
ॐ पुण्यगन्धायै नमः
ॐ सुप्रसन्नायै नमः
ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः
ॐ प्रभायै नमः
ॐ चन्द्रवदनायै नमः
ॐ चन्द्रायै नमः
ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमः
ॐ चतुर्भुजायै नमः (60)
ॐ चन्द्ररूपायै नमः
ॐ इन्दिरायै नमः
ॐ इन्दुशीतलायै नमः
ॐ आह्लादजनन्यै नमः
ॐ पुष्ट्यै नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ शिवकर्यै नमः
ॐ सत्यै नमः
ॐ विमलायै नमः
ॐ विश्वजनन्यै नमः (70)
ॐ तुष्टये नमः
ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः
ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः
ॐ शान्तायै नमः
ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः
ॐ श्रियै नमः
ॐ भास्कर्यै नमः
ॐ बिल्वनिलयायै नमः
ॐ वरारोहायै नमः
ॐ यशस्विन्यै नमः (80)
ॐ वसुन्धरायै नमः
ॐ उदाराङ्गायै नमः
ॐ हरिण्यै नमः
ॐ हेममालिन्यै नमः
ॐ धनधान्य कर्यै नमः
ॐ सिद्धये नमः
ॐ स्त्रैणसौम्यायै [सदासौम्यायै] नमः
ॐ शुभप्रदायै नमः
ॐ नृपवेश्मगतायै नमः
ॐ नन्दायै नमः (90)
ॐ वरलक्ष्म्यै नमः
ॐ वसुप्रदायै नमः
ॐ शुभायै नमः
ॐ हिरण्यप्राकारायै नमः
ॐ समुद्र तनयायै नमः
ॐ जयायै नमः
ॐ मङ्गलायै देव्यै नमः
ॐ विष्णु वक्षःस्थल स्थितायै नमः
ॐ विष्णुपत्न्यै नमः
ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः (100)
ॐ नारायण समाश्रितायै नमः
ॐ दारिद्र्य ध्वंसिन्यै नमः
ॐ सर्वोपद्रव वारिण्यै नमः
ॐ नवदुर्गायै नमः
ॐ महाकाल्यै नमः
ॐ ब्रह्म विष्णु शिवात्मिकायै नमः
ॐ त्रिकाल ज्ञान सम्पन्नायै नमः
ॐ भुवनेश्वर्यै नमः (108)
इति श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलि समाप्तम्.

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