Goddess Durga

विश्वम्भरी स्तुति

(Vishwambhari Stuti)

Traditional

Vishwambhari Stuti is a revered devotional hymn dedicated to Goddess Durga, the protector and sustainer of the universe. Though written in Gujarati, it resonates deeply across Hindu households for its simple yet profound plea for spiritual guidance. The stuti serves as a humble prayer for the removal of ignorance, internal conflicts, and life's miseries. Chanting this hymn is believed to cleanse the mind of negative thoughts and ego, bestowing the devotee with wisdom, clarity, and divine protection against the hardships of the material world. It is a powerful meditative tool for seekers desiring inner peace.

विश्वम्भरी अखिल विश्व तनी जनेता
विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता
दुर्बुद्धिने दूर करी सदबुद्धि आपो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 1 ॥
भूलो पडयी भवरने भटकू भवानी
सूझे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी
भासे भयङ्कर वाली मन ना उतापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 2 ॥
आ रङ्कने उगरावा नथी कोई आरो
जन्माण्ड छू जननी हु ग्रही बाल तारो
ना शु सुनो भगवती शिशु ना विलापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 3 ॥
मा कर्म जन्मा कथनी करता विचारू
आ स्रुष्टिमा तुज विना नथी कोई मारू
कोने कहू कथन योग तनो बलापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 4 ॥
हूवो काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो
आदम्बरे अति घनो मदथी बकेलो
दोषों थकी दूषित ना करी माफ़ पापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 5 ॥
ना शाश्त्रना श्रवण नु पयपान किधू
ना मन्त्र के स्तुति कथा नथी काई किधू
श्रद्धा धरी नथी करा तव नाम जापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 6 ॥
रे रे भवानी बहु भूल थी छे मारी
आ जवोइन्दगी थी मने अतिशे अकारि
दोषों प्रजाली सगला तवा छाप छापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 7 ॥
खाली न कोई स्थल छे विण आप धारो
ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारो
शक्तिन माप गणवा अगणीत मापों
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 8 ॥
पापे प्रपञ्च करवा बधी वाते पुरो
खोटो खरो भगवती पण हूँ तमारो
जद्यान्धकार दूर सदबुध्ही आपो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 9 ॥
शीखे सुने रसिक चन्दज एक चित्ते
तेना थकी विविधः ताप तलेक चिते
वाधे विशेष वली अम्बा तना प्रतापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 10 ॥
श्री सदगुरु शरणमा रहीने भजु छू
रात्री दिने भगवती तुजने भजु छू
सदभक्त सेवक तना परिताप छापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 11 ॥
अन्तर विशे अधिक उर्मी तता भवानी
ग्AUवो स्तुति तव बले नमिने मृगानी
संसारना सकल रोग समूल कापो
माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो ॥ 12 ॥

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